4:48 pm
Randhir Singh Suman

दुनिया की आप़ा धापी में शामिल लोगभूल चुके है अलाव की संस्कृतिनहीं रहा अब बुजुर्गों की मर्यादा का ख्यालउलझे धागे की तरह नहीं सुलझाई जाती समस्याएंसंस्कृति , संस्कार ,परम्पराओं की मिठास कोमुंह चिढाने लगी हैं अपसंस्कृति की आधुनिक बालाएंअब वसंत कहाँ ?कहां ग़ुम हो गयीं खुशबू भरी जीवन की मादकताउजड़ते गावं -दरकते शहर के बीचउग आई हैं चौपालों की जगह चट्टियांजहाँ की जाती ही व्यूह रचनाथिरकती...
4:01 pm
Mahavir Mittal

पत्नी को मौत की नींद सुलाकर पति ने खुद भी किया आत्महत्या का प्रयाससफीदों, (हरियाणा) : आज व्यक्ति मानसिकरूप से इतना परे शान हो चुका है कि उसमेंधैर्य नाम की कोई चीज नहीं रह गई है।परेशानी के कारण चाहे जो भी हो लेकिनपरे शानी व धैर्य की कमी के चलते वह कुछभी कर बैठता है। ठीक इसी तरह का उदाहरणहरियाणा के सफीदों क्षेत्र में घटित हुई एकदर्दनाक घटना के रूप में सामने आया है।सफीदों...
9:13 am
Randhir Singh Suman
वास्तव में इन सबके पीछे अमेरिका की वह रणनीति है जिसके अन्तर्गत वह ईरान जैसे कई देशों के प्राकृतिक संसाधनों पर अपना प्रभुत्व कायम करना चाहता है ताकि वह विश्व में स्वयं को सिरमौर बना सके। ‘‘जिस तरह यह तथ्य सभी जानते हैं कि सारी दुनिया के ज्ञात प्राकृतिक तेल भण्डारों का 60 प्रतिशत पश्चिम एशिया में मौजूद हैं, अकेले सऊदी अरब में 20 प्रतिशत, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में मिलाकर 20 प्रतिशत और इराक व ईरान में 10-10 प्रतिशत तेल भण्डार हैं। ईरान के पास दुनिया की प्राकृतिक गैस का दूसरा सबसे बड़ा भण्डार है, उसी तरह लगभग सारी दुनिया में अमेरिका...
5:16 pm
Randhir Singh Suman
आज इस भूमण्डलीयकरण के युग में जहाँ विश्व को एक ग्राम के रूप में देखने की बात स्वीकारी जा रही है वहीं इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि विभिन्न देशों में सामाजिक स्थिरता, समरसता और अखण्डता को तोड़ने हेतु साम्राज्यवादी शक्तियाँ भिन्न-भिन्न हथकण्डों का प्रयोग कर रही हैं। जहाँ वे एक ओर जन कल्याण की नई-नई सुविधाओं और स्कीमों का प्रचार प्रसार कर रही हैं वहीं दूसरी ओर अपने उद्देश्य की पूर्ति हेतु इसी जन के शोषण को घिनौना रूप देती द्रष्टव्य होती हैं। हम इस बात से भली-भाँति परिचित हैं कि अमेरिका ही इन सब रणनीतियों व षडयंत्रों का सूत्रधार है। वस्तुतः आज...
12:05 pm
Randhir Singh Suman
आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि में आमतौर पर रहस्यवादी दर्शन को सृजनात्मक नहीं माना जाता। उसे जीवन के यथार्थ को अनदेखा कर एक वायवी संसार में पलायन करने का रास्ता माना जाता है। लेकिन मनुष्य के मन को उदारता, प्रेम और समता की भावभूमि की ओर उन्मुख और प्रेरित करने के लिए रहस्यवादी प्रवृत्ति आधुनिक मनुष्य के काम की हो सकती है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने सूफियों के बारे में लिखा है: ‘‘हमारे देश के भक्तों और संतों की भाँति सूफी साधकों ने भी इसी अंतरतम के प्रेम पर आश्रित भाव-जगत की साधना को अपनाया है। यह साधना जितनी ही मनोरम है उतनी ही गंभीर भी। हमारे देश...
12:48 pm
Randhir Singh Suman
मौजूदा दौर में सहिष्णुता, उदारता और आपसी सौहार्द के ऊपर असहिष्णुता, कट्टरता और बदले की भावना का ज्यादा बोलबाला है। केवल कट्टरतावादी शक्तियों का ही वैसा बर्ताव नहीं है, उनके मुकाबले में उभरी प्रतिरोध की शक्तियाँ भी अक्सर असहिष्णुता, कट्टरता और वैमनस्य से परिचालित होती हैं। दुनिया और भारत दोनों के स्तर पर यह परिघटना देखी जा सकती है। आधुनिक सभ्यता के इस दौर में हृदय के प्रेम के लिए कोई स्थान नहीं छोड़ा गया है। यह मानते हुए कि वे सब सामंती युग की भाववादी धारणाएँ हैं। जबकि हृदय के प्रेम को भक्तिकालीन कवियों ने जीवन के केंद्र में स्थापित करने का अनूठा...
1:34 pm
Randhir Singh Suman

भाग इसी प्रकार वर्ष-2009 में मेरी दृष्टि कई अजीबो-गरीब पोस्ट पर गई । मसलन -एक हिंदुस्तानी की डायरी में 10 फरवरी को प्रकाशित पोस्ट -हिंदी में साहित्यकार बनते नहीं, बनाए जाते हैं। प्रत्यक्षा पर 26 मार्च को प्रकाशित पोस्ट -तैमूर तुम्हारा घोड़ा किधर है? विनय पत्रिका में 27 मार्च को प्रकाशित बहुत कठिन है अकेले रहना। निर्मल आनंद पर 05 फरवरी को प्रकाशित आदमी के पास आँत नहीं है...